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बचपन की सोच

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बचपन की सोच में एक आस हुआ करती थी।
        
                                                    
                            
अच्छा कर गुजरने की एक चाह हुआ करती थी।।

उसी चाह को सीने में रख जवानी का मोड़ आया।
प्रतियोगिता में जीतने की हसरत हुआ करती थी।।

सफ़ल होने की आपाधापी में खुद को झोंक दिया।
असफल होने पर अन्दर असंतुष्टि हुआ करती थी।।

अब अपने से कह रही जो मिला वो भी कम नही।
मगर फिर भी 'उपदेश' मिश्र प्यास हुआ करती थी।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक घंटा पहले
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