विज्ञापन

अपने ज़ज्बात सम्भाले बड़ी मुश्किल से

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी खुशी की बात कर अगर चाहत है।
        
                                                    
                            
प्यार करने वालों से यही मेरी इवादत है।।

अपने ज़ज्बात सम्भाले बड़ी मुश्किल से।
तुम्हारे संग साथ में अज़ीब सी अदावत है।।

मेरे रंग उड़ा है तन्हाई से अब और बात है।
तुझको चैट करने की आज से इजाज़त है।।

हवाओ की मुसाफिर हूँ आती जाती रहूँगी।
बंद दरवाजे की झिर्री से आने से आहत है।।

बेखौफ होकर मिलना तुम्हीं ने सिखाया।
शरारत करने की 'उपदेश' पुरानी आदत है।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all