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अपने ज़ज्बात सम्भाले बड़ी मुश्किल से

                
                                                         
                            कभी खुशी की बात कर अगर चाहत है।
                                                                 
                            
प्यार करने वालों से यही मेरी इवादत है।।

अपने ज़ज्बात सम्भाले बड़ी मुश्किल से।
तुम्हारे संग साथ में अज़ीब सी अदावत है।।

मेरे रंग उड़ा है तन्हाई से अब और बात है।
तुझको चैट करने की आज से इजाज़त है।।

हवाओ की मुसाफिर हूँ आती जाती रहूँगी।
बंद दरवाजे की झिर्री से आने से आहत है।।

बेखौफ होकर मिलना तुम्हीं ने सिखाया।
शरारत करने की 'उपदेश' पुरानी आदत है।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक महीने पहले

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