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प्रतिपल अन्याय भरी चालाकी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अच्छा दिल अच्छा स्वभाव
        
                                                    
                            
रखने वालों पर होगा दबाव
रिश्ते नातो में जीवन संघर्ष
दृढ़ रखे अपमानित का भाव

पीड़ा का जो दंश सह गया
वही पाठ पढ़ाता बे-हिसाब
यादें मांसाहारी सी लगती
अभिलाषा में शामिल लगाव

यार सखा से कहने निकला
धर्म मार्ग में द्रुतगामी अभाव
हर मुहूर्त में पैदा होता जीवन
हर मुहूर्त में मरने का दबाव

प्रतिपल अन्याय भरी चालाकी
सबको लगता रहा प्रेम अभाव
आत्मग्लानि पर प्रतिशोध नही
वक्त खो गया 'उपदेश' बे-भाव
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
17 घंटे पहले
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