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मन पे छाया है तेरा ही नशा।

Umesh Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल में आशा जगी, वंदना हो गई,
        
                                                    
                            
तेरा अस्तित्व ही मेरा चमन हो गया।
तेरे चरणों में जब से झुका ये हृदय,
मेरा जीवन तुझे ही समर्पित हो गया।

स्वप्न देखा तो कदम आगे बढ़ने लगे,
नैन तकते रहे, तेरे दर्शन जब हुए।

मन की पीड़ा भी पूजा बनने लगी,
मेरा अश्रु भी तुझको अर्पण हुआ।

दिल में आशाजगी, वंदना हो गई,
तेरा अस्तित्व ही मेरा चमन हो गया।

जिसे अपना समझकर सँजोए बैठा था मैं
वही तेरे चरणों में सब अर्पण हुआ।
हार में भी तेरी इच्छा दिखने लगी,
दर्द भी मेरा अब तुझको अर्पण हुआ।

कुछ न माँगा, न कोई शिकायत रही,
तेरे नाम का ही अब मुझको आसरा।
अहंम का दीपक भी बुझने लगा,
मेरी आत्मा तुझमें ही रमने लगी।

दिल में आशा जगी, वंदना हो गई,
तेरा अस्तित्व ही मेरा चमन हो गया।

राम तेरे नाम का ऐसा सहारा मिला,
जीवन को जैसे नया किनारा मिला।
तेरी महिमा चहुँओर दिखने लगी,
मन पे छाया है तेरा ही नशा।

न कोई इच्छा रही, न कोई कामना,
तेरे चरणों को अर्पित मेरा सारा जहां।
तू ही आरंभ है, तू ही मेरा विराम,
तेरे नाम से ही रोशन मेरा जहां।
 - उमेश मिश्रा
8 घंटे पहले
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