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मोहब्बत की निशानी

Umair samar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क़ में मेरी तरह ज़हमत उठानी चाहिए
        
                                                    
                            
कम से कम तुम को भी मेरी याद आनी चाहिए

चंद लम्हों तक तुम्हें सोचा तो ग़ज़लें हो गईं
और क्या तुम को मोहब्बत की निशानी चाहिए

जिन के शजरे तक पुलिस थाने में रक्खे हैं जनाब
ऐसे लोगों को भी रिश्ता ख़ानदानी चाहिए

इस अँधेरी रात में सूरज के क्यूँ हैं मुंतज़िर
इन चराग़ों को भी कुछ हिम्मत दिखानी चाहिए

ऐसा लगता है की यूँही रायगां हो जाएगा
अब मेरे किरदार को कोई कहानी चाहिए

मुस्कुराना इस लिए भी फ़र्ज़ है मुझ पर 'समर'
अहल-ए-दुनिया को मिरी आँखों में पानी चाहिए
5 घंटे पहले
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