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उमैर जिसको समझता था इत्रदान की

Umair samar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नज़र में सबकी जो क़ीमत मेरी ज़बान की है
        
                                                    
                            
ये आबरू मेरे कुनबे की खानदान की है,

अभी तो पर भी मेरे ठीक से नहीं निकले,
मगर निगाह मेरे सर पे आसमान की है।

ज़हन पे उतरी है इलहाम बनके जो मेरे,
वो बात चाँद सितारों के दरमियान की है

इसीलिए तो तुझे दावत ए ख़िताब न दी,
मैं जानता था जो क़ीमत तेरे बयान की है

महक़ थी वो किसी दरवेश के पसीने की,
उमैर जिसको समझता था इत्रदान की
3 घंटे पहले
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