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अगली बार के लिए ,पैसा जमा कर रहे हो

UDAY SHARMA

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गरीबों के हक की छत छीनकर तुम
        
                                                    
                            
कंबल बाँटकर राजनीति कर रहे हो

बड़े लाजवाब हो, होने वाले मंत्री जी
इज्जत बेचकर इज्जत कमा रहे हो

गरीबों को गरीब बनाने का हुनर है तुममें
अब उनके सामने रहनुमा बन रहे हो

कभी घर जाकर आईने से पूछना
मूर्ख हो या लोगों को मूर्ख बना रहे हो

महलों में बैठकर कभी-कभी गंध तो आती होगी
नाक खराब है या सेंट से महका रहे हो

कभी जाया करो उन वादों वाली गलियों में
कीचड़ से जूते और लोगों से मुँह छुपा रहे हो

कल तक हाथ-पैर पकड़ रहे थे मंत्री जी
कुर्सी मिलते ही हाथ पैर पकड़वा रहे हो

याद रखना पैसों पे वोट देने वाले है ये पब्लिक
अगली बार के लिए ,पैसा जमा कर रहे हो
एक घंटा पहले
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Dn Chaubey

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