कब तलक मुझसे दामन छुड़ाओगे तुम
प्रेम के पाश में फस ही जाओगे तुम
मैं प्रतीक्षा करुँगी हज़ारों जनम
मुझको आवाज़ दे कर बुलाओगे तुम
— त्रिशिका धरा