कब कहा तुम मेरी ही अमानत रहो
तुम जहाँ भी रहो बस सलामत रहो
मुझको काशी-मदीना नहीं चाहिए
तुम मेरी धड़कनों की इबादत रहो
— त्रिशिका धरा