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दूसरा नरेन्द्र काशी आया

देवसुधा पत्रिका

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक नरेन्द्र पूरब से
        
                                                    
                            
दूसरा पश्चिम से
काशी है आया
एक ने हिन्दुत्व दर्शन
दूसरे ने हिन्दुस्तान
आगे बढ़ाया।
घर से जाति-पात
एक ने सब हुक्के
पी- पीकर भगाया
दूसरे ने सबका साथ
सबका विकास मंत्र
जीवन में अपनाया।
यह परिव्राजक सा
देश देशान्तर घूंमे
मातृभमि बढ़े आगे
सर्वोच्च शिखर चूंमे।
आम से खास इन्होंने
बचपन से युवा तक
कर्म से बना लिया
दरिद्र है नारायण
प्रत्यक्ष कर-करके
जग को सिखादिया
सदियों में ऐसे आदर्श
एक दो ही जन्मने
धरा पर आते हैं
धन्य वो मनुज होते
इनको आदर्श मानकर
जीवन में अपनाते हैं,
कुछ करने बढ़ने
ख्यातिलब्ध होने का
सपना पाले पूरा कर पाते हैं,
इनकी आयु न
कर्म की श्रेष्ठता
जीवन के संकल्प
उनकी सिद्धता
प्रदर्शन नित्य प्रति
आगे और आगे बढा,
कर्तव्यबोध विश्वपटल पर
हर क्षेत्र में दिखाकर
अनुकरणीय बनाते हैं
धन्य भाग्य जीवन उनके
जो आदर्श मानकर
जीवन पथ पर
आगे बढ जाते हैं
अपने संकल्प पूर्ण कर
जननी जन्मभूमि का
कर्तव्य निभाते हैं,
राष्ट्र, राष्ट्रधर्म पहले
हर सांस में भर
अपना सर्वस्व लुटाते हैं।
12 घंटे पहले
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