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ऊँच नींच का झगड़ा

Tejinder Dutt Fhulara

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझमें, तुममें,
        
                                                    
                            
तुममें, हममें,
जीव, जंतु और,
हर जीवन में,
एक ही आत्मा,
है हम सब में,
फिर काहे का रगड़ा,
ऊंच-निंच का झगड़ा,
प्रभु जी,
ऊंच-निंच का झगड़ा,

ना कोई छोटा,
बड़ा ना कोई,
प्रभु मूरत सब में,
एक होई,
जात-पात फिर,
करे क्यों कोई,
फिर काहे का रगड़ा,
ऊंच-निंच का झगड़ा,
प्रभु जी,
ऊंच-निंच का झगड़ा,

जिस माटी की,
काया तेरी,
उस माटी की,
देह ये मेरी,
जिसने जीवन,
तुमकों दिया है,
उससे जीवन,
मुझको मिला है,
फिर काहे का रगड़ा,
ऊंच-निंच का झगड़ा,
प्रभु जी,
ऊंच-निंच का झगड़ा,

सूर्य ज्ञान दे,
समरसता का,
पवन भी समरस,
होकर बहे है,
प्यास ये नदियाँ,
सबकी बुझाएँ,
तरुओं के फल,
हर कोई खाये,
फिर काहे का रगड़ा,
ऊंच-निंच का झगड़ा,
प्रभु जी,
ऊंच-निंच का झगड़ा,

आओ छोड़े,
जातिवाद को,
सबको गले लगायें,
मानवता है जाति हमारी,
सबको ये समझायें,
एक स्वर में राष्ट्रवाद का,
नारा फिर दोहरायें,
रगड़ा छोड़े ऊँच-नींच का,
झगड़ा ये निपटायें,
समरस हो फिर समरसता की,
ज्योत से ज्योत जलायें,
प्रभु जी,
ज्योत से ज्योत जलायें,

 
11 घंटे पहले
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