कोई किनारे में डूबा,
किसी को डुबोया टूटे ख्वाब ने !
मुझे तो डुबाया साथियों,
मेरे अश्कों के सैलाब ने !
ना दिल टूटता ना दिल
पे गहरा घाव होता !
तो फिर दोस्तों शायरी में
कैसे ठहराव होता !!
शुक्रिया मेरे दोस्तों
और मेरे अपनों का !
कुछ अधूरे ख्वाबों
और टूटे हुए सपनों का !
ना दिल-ए-जख्म देते,
ना मझधार में छोड़ा होता !
दीदार ए यार बनकर,
ना दिल को यूं तोड़ा होता !
किसी की बेवफाई पर,
यूं फूट फूटकर ना रोता !
तो फिर दर्द ए मोहब्बत को
शायरी में कैसे पिरोता !
गमों से दोस्ती कर ली है,
अश्कों को साथ सुलाता हूॅऺ !
मायूस सी इस जिंदगी में,
दर्दे शायरी का तड़का लगाता हूॅऺ !
- वेंकट श्रीनिवास