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दर्दे शायरी का तड़का लगाता हूॅऺ !

                
                                                         
                            कोई किनारे में डूबा,
                                                                 
                            
किसी को डुबोया टूटे ख्वाब ने !
मुझे तो डुबाया साथियों,
मेरे अश्कों के सैलाब ने !

ना दिल टूटता ना दिल
पे गहरा घाव होता !
तो फिर दोस्तों शायरी में
कैसे ठहराव होता !!

शुक्रिया मेरे दोस्तों
और मेरे अपनों का !
कुछ अधूरे ख्वाबों
और टूटे हुए सपनों का !

ना दिल-ए-जख्म देते,
ना मझधार में छोड़ा होता !
दीदार ए यार बनकर,
ना दिल को यूं तोड़ा होता !

किसी की बेवफाई पर,
यूं फूट फूटकर ना रोता !
तो फिर दर्द ए मोहब्बत को
शायरी में कैसे पिरोता !

गमों से दोस्ती कर ली है,
अश्कों को साथ सुलाता हूॅऺ !
मायूस सी इस जिंदगी में,
दर्दे शायरी का तड़का लगाता हूॅऺ !
- वेंकट श्रीनिवास
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14 मिनट पहले

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