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मुझ को बे-जान कर के छोड़ेगा

TasleemwriteS official

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            'इश्क़ वीरान कर के छोड़ेगा
        
                                                    
                            
मुझ को बे-जान कर के छोड़ेगा

ये करेगा सुपुर्द-ए-ख़ाक मुझे
प्यार हलकान कर के छोड़ेगा

ऐसा माहौल कर दिया घर का
घर को शमशान कर के छोड़ेगा

मेरे उस्ताद का सबक़ इक दिन
मुझ को विद्वान कर के छोड़ेगा

एक दूजे के ख़ूँ का प्यासा हुआ
क्या ही इंसान कर के छोड़ेगा

दर-हक़ीक़त मिरा ख़ुदा 'तस्लीम'
मुझ को सुलतान कर के छोड़ेगा
एक महीने पहले
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Manju Sharma

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