विज्ञापन

क्या फर्क पड़ता है

Swati Rawal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या फर्क पड़ता है
        
                                                    
                            
मेरे होने या ना होने से
क्या फर्क पड़ता है
मेरे दिल के उदास होने से
...या मेरे तन्हाई में रोने से
आखिर क्या ही फर्क पड़ता है
मेरे होने या ना होने से

क्या तेरी सांसे सहमी हैं
जो मेरी आंखें नम हों तो
क्या तेरा दिल तड़पता है
जो मुझसे मिलना कम हो तो
जो नहीं तो क्या फर्क पड़ता है
मुझे पाने या फिर खोने से

आखिर क्या ही फर्क पड़ता है
मेरे होने या ना होने से

क्या नींद तुझे ना आती है
क्योंकि अब मैं तेरे पास नहीं
क्या खाब अधूरे हैं तेरे
क्योंकि उनमें मेरी आस नहीं
जो नहीं तो क्या फर्क पड़ता है
अब जगने या फिर सोने से

आखिर क्या ही फर्क पड़ता है
मेरे होने या ना होने से

क्या तेरा सवेरा चुप सा है
जब मुझसे तेरी बात नहीं
क्या शामें तेरी तन्हा हैं
जब अब मैं तेरे साथ नहीं
जो नहीं तो क्या फर्क पड़ता है
मेरे कहने या चुप रहने से

आखिर क्या ही फर्क पड़ता है
मेरे होने या ना होने से
- स्वरा
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10784 कविताएं

View Profile

Chitra Panwar

31 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

461 कविताएं

View Profile

Ipsita Bhadauria

37 कविताएं

View Profile