अगर परखोगे तो कुंदन सा ही ईमान निकलेगा,
दिलों में कुछ बड़ा करने का भी अरमान निकलेगा।
मेरी पीढ़ी के ये लड़के भले कितने भी हों मॉडर्न,
मगर चीरेंगे ये सीना तो "हिन्दुस्तान" निकलेगा।
भले ही रंग मस्ती का घुला हर बात में होगा,
ज़वानी की खुमारी का नशा भी साथ मे होगा।
मगर जब बात होगी देशहित कुछ कर दिखाने की,
कफ़न सर पर वतन दिल में तिरंगा हाथ में होगा।
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