विज्ञापन

वीर रस

Swadesh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अगर परखोगे तो कुंदन सा ही ईमान निकलेगा,
        
                                                    
                            
दिलों में कुछ बड़ा करने का भी अरमान निकलेगा।
मेरी पीढ़ी के ये लड़के भले कितने भी हों मॉडर्न,
मगर चीरेंगे ये सीना तो "हिन्दुस्तान" निकलेगा।

भले ही रंग मस्ती का घुला हर बात में होगा,
ज़वानी की खुमारी का नशा भी साथ मे होगा।
मगर जब बात होगी देशहित कुछ कर दिखाने की,
कफ़न सर पर वतन दिल में तिरंगा हाथ में होगा।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

613 कविताएं

View Profile

Sandeep Singh

4538 कविताएं

View Profile