आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वीर रस

                
                                                         
                            अगर परखोगे तो कुंदन सा ही ईमान निकलेगा,
                                                                 
                            
दिलों में कुछ बड़ा करने का भी अरमान निकलेगा।
मेरी पीढ़ी के ये लड़के भले कितने भी हों मॉडर्न,
मगर चीरेंगे ये सीना तो "हिन्दुस्तान" निकलेगा।

भले ही रंग मस्ती का घुला हर बात में होगा,
ज़वानी की खुमारी का नशा भी साथ मे होगा।
मगर जब बात होगी देशहित कुछ कर दिखाने की,
कफ़न सर पर वतन दिल में तिरंगा हाथ में होगा।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर