हमने बहते सपने देखे उन शूरो की आंखों में,
जिसने जान की बाजी लगा दी भारत माँ की आज़ादी में।
लहू बहाया जान लुटा दी जिस देश की रक्षा में,
वहां के नेताओं ने लाज बेच दी इच्छाओं में।।
फाँसी चढ़ गए भगत सिंह हँस कर राष्ट्रप्रेम की खातिर,
आज़ाद ने भी गोली खाई अपने ही हाथो से है।
बोस चल बसे जिस देश की आज़ादी को,
नेताओ ने देश बाँट दिया अपनी कुर्सी चाहत में है।।
कश्मीर जल रहा जाने किन गुनाहों मे,
बगदादी हाफ़िज़ बोल रहे क्यों इन बातों में।
क्या अपनी बाजू की ताकत से हम इतने कमजोर हुए,
साथ चाहिए हमको अब चीन पाकिस्तान नापने में है।।
राणा के वंशज है हम हार मानना कभी न सीखा हमने,
देखा जौहर को हैं अपनी, लज्जा रक्षा करने में हमने।
वीर गाथायें लिखी हैं हमारी पूर्वजो की किताबो मे,
हम क्यों हुए अब कमजोर इन आतंकी फरमानों से।।
कान खोल कर सुन लो अब ऐ विश्व समूचे,
जुबान काट दी जाएगी तुम्हारी, जो बोले तुम स्वर ऊंचे।
गर्दन नही बचेगी धड़ पर अगर बढ़े पाँव सीमा पर,
खाक कर दी जाएगी नस्ल तुम्हारी जो की गुस्ताखी तुमने।।
संयम देखा है तुमने, देखा है भाईचारा हमारा,
प्रेम और शांति देखी तुमने, देखा है शौर्य हमारा।
सेना नहीं लड़ाकों की हम, भारत माँ के वीर सपूत हैं
प्राणों की बाजी भी देंगे अगर मरना तुम्हारी तकदीर है।।
- सुशील अनजान
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