विज्ञापन

जिसे तुम कहते रहते हो सपनों का शहर।

Suryansh Reetma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितनों के ख़्वाबों को दे गया है ये ज़हर
        
                                                    
                            
जिसे तुम कहते रहते हो सपनों का शहर।

-सूर्यांश रीतमा
21 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7573 कविताएं

View Profile