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जिसे तुम कहते रहते हो सपनों का शहर।

                
                                                         
                            कितनों के ख़्वाबों को दे गया है ये ज़हर
                                                                 
                            
जिसे तुम कहते रहते हो सपनों का शहर।

-सूर्यांश रीतमा
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21 घंटे पहले

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