तेरी तस्वीर
तेरी तस्वीर में
कुछ है जो
अल्फ़ाज़ ओ अहसास
को हवा देता ,
कुछ मुकद्दस सा
इश्क़ सा बयां होता है।
वरना तो ज़माना कब का
महजबीं बानो को भुला देता है।
घूम-घूम के
झूम झूम के
आती है,
शबनमी सदा तेरी।
अब के तो
ल्योन में पाकीज़ा
के सहन से,
गूँजी है सदा तेरी।
कुछ रंगीन सी
कुछ शबनमी सी
कुछ नम आँखों
की आब सी,
दिलों को छू गई
देखी जो अदा तेरी।
तेरी तस्वीर में कुछ है?!
जो साहिर सा बयां होता है।
क्या ?कैसे ?कब !!
इस जहां को बताएं
के महजबीं बानो के
वज़ूद से क्या क्या
बयां होता है???!
आपका मित्र
-सूर्यकांत शर्मा