विज्ञापन

रिश्ते भी गए

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रिश्ते भी गए,,,,
        
                                                    
                            

रिश्ते भी गए,
नाते भी गए,
लगता है,
ऊपर वाले की
टकसाल में उन्हें
ढालने वाले
कामगार -कारीगर
भी गए।

पहले कभी रिश्ते
नातों की रफ़ूगरी
होती थी।

गिले-शिकवे- शिकायतों
को दूर करने वाले,
राफ्ता कायम
करने वाले!
अब तो लगता
है के वो
रफ़ूगरी -ए -जादूगर
भी गए।
ग्लोकल से ग्लोबल
के दौर में ,' सूर्य,'
भाषा की
लोकोक्तियाँ ऑ
मुहावरे भी गए।

रिश्ते नातों की
बात ही क्या
बरगद सी छाया
वाले बजुर्गों की
याद ही क्या?!
भाषा -संस्कृति
की बिसात ही
क्या?!
अब तो संस्कार
रौंपने वाले
फरिश्ते भी गए।

सियासत है
निज़ाम है,
पर इनकी
आलमी तासीर
से मेरे मुल्क के
सारे सहारे भी गए।
-सूर्यकांत शर्मा
7 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7409 कविताएं

View Profile