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क्या होता,,,व्यंग्य,,,

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            व्यंग्य क्या ?!
        
                                                    
                            
व्यंग्य क्या
भई पूछते भी हो
तो क्या???
दुनिया की विसंगतियों
का वांग्मय,
मानव मन का
तादात्म्य।
समाज में उमड़ते
घुमड़ते राजसी तामसिक
भावों का महात्म्य !!!
किसी तानाशाह को
आईना दिखाने का
अपराध अक्षम्य।
-सूर्यकांत शर्मा
 
2 घंटे पहले
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