विज्ञापन

गृहस्थ जीवन के बगीचे में

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करवा चौथ का रंग
        
                                                    
                            

लगता है कि आज
करवा चौथ का कुछ
नया सा रंग है।
जेन जी जेड ओ
अल्फा ए दुनिया का
बदला - बदला सा ढंग है।
रवि को भी मिला
उम्र का कुछ नया
सा आभासी संग है।
सिंदूरी से लाल हो गया
सुहाग के जोड़े का रंग है।

अब तुम ही कहो!?
क्या उतर आया सच में
मन ऑ आंखों से
प्रेम का साकार सा
कोई स्वार्गिक रूप- रंग है?!

लाल सोहाग का जोड़ा
यूं ही नहीं मिलता,
इसके लिए चाहिए
अग्नि समक्ष सात फेरों का
आप्त काम का सा सतरंग है।

कामना के संग प्रेम का
जब होता मधुपर्क का
मीठा मीठा सा रस रंग है,
तभी मिलता करवा चौथ
का सत्संग है।
गृहस्थ जीवन के बगीचे में
हर साल खिलता,
कामदेव के बाणों का
सप्तरंग है।
काम अनंग हुआ तो
क्या हुआ?!
हमारी आधी आबादी को
मिला रति का संग है।
मत कहो
मत देखो
इसे महज़
खान पान के आईने में!?
साल दर साल
पाया युगल
कुछ विरल सा
प्रेम रंग है।
-सूर्यकांत शर्मा
6 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all