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रोटी में उलझी जिंदगी

Suresh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गरीबी आने के बाद ,
        
                                                    
                            
या यों कहे तो - -
गरीबी में,
कभी - कभी - -
रिश्ता भी ,
टूट जाता है - -
वो जो,
खास होता है - -
और ,
इसके विपरीत ,
जब पैसा रहे पास - -
बन जाते हैं,
हजारों यार - -
ना रहे पैसा पास,
यार संग भी - -
ना डोले l

यदि ,
रोज याद - -
नहीं कर पाऊँ ,
इस ज़माने में - -
तो भूल से,
खुदगर्ज ना - -
समझ लेना ,
दरअसल - -
इस छोटी सी,
जिंदगी में - -
परेशानियाँ भी,
बहुत है l

ऐसा नहीं कि,
मेरे हमदर्द या - -
दोस्त नहीं है,
मेरे बहुत - -
अच्छे दोस्त भी है ,
इस ज़माने में भी - -
लेकिन ,
मैं किसी को - -
भूला नहीं हूँ,
सच कहे तो - -
ये जिंदगी ही,
उलझी पड़ी है - -
दो वक़्त की,
रोटी कमाने में l
-सुरेश कुमार झा अल्हर
एक घंटा पहले
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