कहा भी गया है कि,
जापर कृपा - -
राम का होई ,
सो सब बंधन से - -
तर जहई ,
अर्थात् - -
प्रभु के कृपा,
होने से - -
असंभव काम भी,
संभव हो जाता है l
भाग्य का लेख भी,
ईश्वरिय शक्ति से - -
संभव हो पाता है ,
इसलिए जो - -
भाग्य में नहीं,
लिखा है - -
उसे दुनियाँ की,
कोई भी शक्ति - -
मुझे नहीं,
दे सकती है - -
ओर जो,
मेरे भाग्य में है - -
उसे दुनियाँ की,
कोई भी - -
शक्ति हमसे,
छीन नहीं सकती है l
इसी क्रम में,
इंसान को - -
ईश्वरिय शक्ति या,
उनकी सत्ता को - -
स्वीकार करना होगा,
क्योंकि ?
इंसान में - -
अभिमान आ जाता है - -
या यों कहे तो,
अभिमान में - -
चूर हो जाता है तो,
तो कहने लगता है - -
या कहता ,
फिरता है कि - -
मुझे किसी की,
जरूरत नहीं है - -
वही इंसान,
जब अपने - -
अनुभव का ,
सहारा लेता है - -
तो समझता है कि,
मौका परने पर - -
धूल की भी,
जरूरत पड़ती है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'