हवाई जहाज से आई बिमारी,
गरीब की ढह गई चार-दीवारी।
उडने वाला आज भी उडता,
पखं फैला नित नभ मे चढता।
गया गरीब गांव छोडकर,
मात पिता से मुहं मोडकर।
जिनके भरोसे घर से निकला,
वो निकले ना हितकारी।
गरीब की ढह गई चार-दीवारी।
उडने वाला घर के अंदर,
आज भी नित मौज उडाये।
जिन के बल पर बडा हुआ,
वो सब अपने घर को भगाये।
वो क्या समझे किसी गरीब की,
कैसी होती लाचारी।
गरीब की ढह गई चार-दीवारी।
नंगे पावं और घर की दूरी,
निकल पडे लेकर मजबूरी।
दिन रात है चलते जाते,
घर की ओर पग बढते जाते।
पेट से ज्यादा जान है प्यारी।
गरीब की ढह गई चार-दीवारी।
घर बार छोड शहरों को आये,
भूख पेट की क्या क्या ना कराये।
सपने सब रह गये अधूरे,
कहॉ से आई ये बीमारी।
गरीब की ढह गई चार-दीवारी।
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