बांवरा मन
बांवरा मन देखे तुझे,
तेरे ही सपनों की परतों में डूबा रहे।
हर धड़कन में,
तेरे नाम की कोई अनकही सरगम बजती रहे।
जाने क्या जादू है तेरी यादों का —
एक अरसा बीत गया,
पर मौसम अब भी तेरे ही रंग में भीगा है।
तेरे नाम से ही कांप उठता है मन,
जैसे कोई पुराना गीत
फिर से गुनगुनाने लगा हो।
हवाएँ भी हो जातीं बांवरी,
जब तेरी खुशबू से टकराती हैं।
क्या खता थी मेरी,
जो तू न मिला —
और मैं,तेरी यादों में
बांवरी हो गई।
-सुजाता चक्रवर्ती