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धरती की प्यास भी अब, उतनी नहीं रही है

Sudhir Bansal

Mere Alfaz
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                            कुछ हमसे कहते-कहते,
        
                                                    
                            
वह रूक गए अचानक |
पहले ही शब्द उनके,
बाकी बता रहे हैं |

धरती की प्यास भी अब,
उतनी नहीं रही है|
होती हुई ये बारिश,
और बादल बता रहे हैं |

-सुधीर बंसल

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