नौ दिनों तक माँ के द्वार, आता है सारा संसार,
शेर सवारी जननी आती, करने को जग का उद्धार।
पहला रूप शैलपुत्री का, शक्ति का आधार है,
दूजा ब्रह्मचारिणी माँ, भक्ति का ये सार है।
तृतीय चंद्रघंटिका माँ, घंटा नाद बजाए,
चतुर्थ रूप कुष्मांडा का सृष्टि को रचाए।
पंचम रूप स्कंदमातु का, ममता ये लुटाती हैं
छठा कात्यायनी बनकर, दुष्टों को मार गिराती है।
सप्तम कालरात्रि माँ, अंधकार मिटाए,
अष्टम रूप माँ गौरी का, उजियारा फैलाए।
नवम् रूप सिद्धिदात्री माँ, सब पर सिद्धि बरसाती है,
इन नौ रूपों में माँ दुर्गा, घर-घर में पूजी जाती हैं।
अंबेडकर नगर से विनती है , मैया सुन लो पुकार,
सुधा के घर में करती रहना अपनी कृपा की बौछार।