अंबेडकरनगर की धरती पर, एक लाल बड़ा निराला था,
दौलतपुर मठिया में जन्मा, शिव-प्रमिला का लाला था।
छह बहनों में इकलौता भाई, घर का दीपक प्यारा था,
बचपन विशाखापट्टनम में बीता, जीजा ने जिसे संवारा था।
सोलह में CISF ज्वाइन किया, वर्दी को धर्म बनाया,
इक्कीस में असिस्टेंट कमांडेंट बन, देश को शीश झुकाया।
कठुआ के हाइड्रो प्लांट पर, ड्यूटी जब वो निभा रहा था,
देश की रक्षा में तैनात होकर अपना लहू बहा रहा था।
दूजा वीर गुजरात-मुंबई का, आकाश का वह रखवाला है,
कैप्टन स्मित मच्छर नाम है उसका, लाखों का दिलवाला है।
साढ़े नौ हजार घंटे भरे ,ग्यारह साल स्पाइसजेट उड़ाया,
फ्लाई-दुबई का कैप्टन बनकर, आसमान में पर फैलाया।
दुबई से तेल अवीव जा रही थी, एक सौ चौहत्तर जानें,
सह-पायलट ने चाकू मारा, विमान को लगा गिराने।
लहूलुहान था, फिर भी वीर ने हिम्मत नहीं हारी,
कॉकपिट का दरवाजा खोला, बचा ली जानें सारी।
एक ने जमीन पर वर्दी में, प्राण देश पे वार दिए,
एक ने आकाश में उड़ते-उड़ते, बंधकों को तार दिए।
एक शहीद हुआ कठुआ में, तिरंगे में लिपट के आया,
एक घायल होकर भी देखो, हिन्द का हीरो कहलाया।
कर्तव्य से बड़ा कुछ नहीं अंकित ने सिखलाया हमको,
हौसला मौत को भी हराता है स्मित ने बतलाया सबको।
दोनों की वीरता अमर है, दोनों भारत की शान हैं,
अंबेडकरनगर से मुंबई तक, अब दोनों की एक पहचान है।
भारत माता के दो बेटे, दोनों पर अभिमान है,
एक शहीद, एक रक्षक, दोनों ही लाल महान हैं।।