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परचा

subhash yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देखा खम्भों पर ,
        
                                                    
                            
लगा रहा था नया परचा
वह तो
पुराने परचों के ऊपर
लेयी लगा-लगाकर
हाँ ! सड़क किनारे
फुटपाथ वाली दीवार पर
वह नौजवान लड़का
जहाँ दीवारों को
आते- जाते लोग
हरदिन रंग देते हैं
गुटका -पान खाकर
परचे पर लिखा होता हैं मिले तुरंत -अनपढ़ -ग्रेजुएट सभी को
नौकरी की गारंटी
तनख्वाह भी ठीक -ठाक लिखी
फिर क्यों ?
एक प्रश्न पीछा करता रहा देर तक
उस नौजवान को देखकर ॥

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले
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