तु जानता नही
मैं जानता हूँ
तेरी खामोशियों को
पहचानता हूँ
क्यों की तु
बोल नही सकता !
अहमियत तेरी मानता हूँ ।
अरे ! हासिल
तुझे महारत हैं
देश की चलती
व्यवस्था का तू रथ हैं
तू ही तो जनपथ हैं
तू ही तो जनपथ हैं
हाँ ! चले जिसपर
परचम लहराये ,
गीत गाये महारथीयो ने गाथा
जुड़ा जो जन -मन -गण से ,
उम्मीद लिये एक नयी आशा ,
जिससे तय होता आया हैं
यही प्रवर्तक कर्म पथ हैं
दिल्ली का तू जनपथ
तू ही तो जनपथ हैं
तू ही तो जनपथ हैं
हाँ ! अनंत रैलियां,
विद्रोह मन के ,
ब्रिटिश काल और मुगल के ,
देखा तुने भर नजरों से
भीगे नैनौ के जल से ॥
बहे पसीने लहू कितने
लिये दाग,
तू लथपथ हैं
तू ही तो जनपथ हैं
तू ही तो जनपथ हैं ॥
हर वर्ष मनाता सज -धज कर
यह देश तुम्हारा जन्मदिवस
धरती सजती निल-गगन तक
आता जब गणतंत्र दिवस ।
तब लोहा मानता जग यह
होता जिससे अवगत हैं
भला कौन नही जानता
तू ही तो जनपथ है
तू ही तो जनपथ ॥
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