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बादलों में चाँद

subhash yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अटक गई है गेंद कोई
        
                                                    
                            
बादलों में फंसकर कर
जा पहुँची माँ देखो
बादलों में अटक कर
क्या ऐसी डोर कोई
है जिससे बाँधकर ?
लें आये धरा पर
फिर जिसे उतारकर !
माँ बोली, यह चाँद है नभ का
गेंद नहीं किसी की
खिलौने सी चाँद लगती
यह देन है प्रकृति की ॥



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