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बादलों में चाँद

                
                                                         
                            अटक गई है गेंद कोई
                                                                 
                            
बादलों में फंसकर कर
जा पहुँची माँ देखो
बादलों में अटक कर
क्या ऐसी डोर कोई
है जिससे बाँधकर ?
लें आये धरा पर
फिर जिसे उतारकर !
माँ बोली, यह चाँद है नभ का
गेंद नहीं किसी की
खिलौने सी चाँद लगती
यह देन है प्रकृति की ॥



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7 वर्ष पहले

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