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सच मौन है, झूठ शोर करता है

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच की कोई आवाज़ न होती, झूठ तो ज़ोर शोर करता है,
        
                                                    
                            
सच खामोशी से चलता है, झूठ तो शोर मचाता है।

सच को अपनी राहों पर, विश्वास अटल रहता है,
झूठ सदा डर के साये में, बेचैन खड़ा रहता है।

सच को लाख दबाओ फिर भी, वो आगे आता है,
झूठ का महल बड़ा हो कितना,अंत समय ढह जाता है।

झूठ सजाता शब्दों को, सच कर्मों से पहचाना जाता,
झूठ मुखौटे बदल-बदलकर, सच का है रूप बनाता।

सच को गवाहों की क्या चिंता, सच का अपना मान है,
झूठ हज़ार दलीलें दे दे, सच की अलग पहचान है।

झूठ भीड़ को साथ में लेकर, सच को अकेला करता है,
लेकिन वक्त गवाही देकर, दूध को दूध और पानी को पानी करता है।

सच की राह कठिन होती है, काँटों से भर जाती है,
झूठ की राहें फूलों जैसी, अंत में ठोकर खाती हैं।

सच के पथ पर चलने वाले, धीरज कभी न खोते हैं,
झूठ के ऊँचे महलों के भी, एक दिन पर्दे खुलते हैं।

इसलिए ऐ मानव! जीवन में, सच का साथ निभाना है,
झूठ भले ही शोर मचाए, सच का दीप जलाना है।

शोर मचाने से कभी भी, सच छोटा नहीं हो जाता,
वक्त भले ही देर करे, सच का सूरज उग जाता।
— सूबा लाल ‘अंजाना’
14 घंटे पहले
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