विज्ञापन

आस्मां रौशन और रौशन धरती, जले जगमग दीप दिवाली के..

Shrikant Dubay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर घर को रौशन करती,
        
                                                    
                            
जले जगमग दीप दिवाली के
आस्मां रौशन और रौशन धरती,
जले "जगमग" दीप दिवाली के
"फड़फड़-फड़फड़" लड़ीयां फुटे
"छरछर-छरछर" फुलझड़ीयां छुटे
"सतरंगी छटा" झिलमिल बिखरे
जैसे "आसमान" से तारे टूटे
हर घर जलती "मिट्टी का दीया"
हर घर बंटते "खील-बताशे"
आओ मिलकर झूमे नाचे
बज रहे मृदंग और "ढोल-ताशे"
घर आंगन सब चमके-दमके,
हर चेहरे पर रौनक खुशहाली के
कटी बरसात, फिर कटे फसल
और कटे दिन बदहाली के
हर घर को रौशन करती,
जले जगमग दीप दिवाली के
आस्मां रौशन और रौशन धरती,
जले जगमग दीप दिवाली के..
 
22 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7573 कविताएं

View Profile