हमें पता है
बढ़ते तापमान का राज
इसे सब जानते हैं
पर तुझे काटते हैं
अपनी जरूरत के लिए
इनकी जरूरतें
कुछ खास है
शायद तुझसे ज्यादा।
लोग शायद भूल जाते हैं
कि उनकी सांसें
किनकी सांसो पर टिकीं हैं
जो बदल देते हैं
जहर को अमृत में
जिस जहर को
फैला रहीं हैं
हमारी शौक।
जो ये मोहब्बत है
तुम्हारे होने से है
तुम्हारे खिलने से
आता है बसंत
फिर निकलती है
प्रेम की धारा
तुम्हारे बदलने से
बदल जातीं हैं
अभिलाषाएं
और बदल जाता है
शरीर का रंग।
तुम्हारी चाह है मुझे
नहीं होने दूंगा जुल्म
जो हो रहा तुम्हारे साथ
मैं अकेला नहीं
साथ में और हैं लोग
पर वो लोग ज्यादा हैं
जो कर रहे हैं
तुम्हारी हत्या
और अपने ही भविष्य को
बर्बाद।
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