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सूख गई आँखों की नदियाँ

Shreyasi Satish

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब हम दूर-दूर थे,
        
                                                    
                            
तो कितने पास-पास थे,
होकर पास-पास हम,
फिर दूर-दूर हो गए।

अब यह दिल भी करता नहीं
शोर धड़क-धड़क,
न ही आती है प्यार की
कोई महक-वहक।

सूख गई आँखों की नदियाँ,
भीगते नहीं अब कोर,
न वह चितवन रही,
न रहा चाँद-चकोर।
7 घंटे पहले
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