विज्ञापन

तो हम भी ग़ैरों को अपना बनाए हुए हैं।

Shreyasi Satish

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम अपनों से ही धोखा खाए हुए हैं,
        
                                                    
                            
उन्हीं के सितम से सताए हुए हैं।

पहुँच न पाया कोई दिल की गहराई तक,
मुझीपर इल्ज़ाम सारे लगाए हुए हैं।

छोड़ दिया मैंने अब यकीं दिलाना सबको,
जब वो मुझपर भरोसा ही गवाँए हुए हैं।

आख़िरी मोड़ पर छूट जाता है साथ सबका,
तभी तो हम तन्हाई गले लगाए हुए हैं।

अपने सभी जब हो गए हैं पराए यहाँ,
तो हम भी ग़ैरों को अपना बनाए हुए हैं।
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all