तेरे दिल मे मोहब्बत की सनम इक तार जुड जाए ।
तो मेरे दिल का अँधियारा कसम से दूर हो जाये ।।
कभी कम हो नही सकती है ऊर्जा मेरी धड़कन की ।
तुम्हारी याद आते ही उजाला घर मे हो जाये ।।
वो उतना दूर जाते है मैं जितना पास आता हूँ ।
मैं सागर हूँ मगर आंसू से प्यास अपनी बुझाता हूँ ।।
नही है डर मुझे कुछ भी किसी तूफान आंधी का ।
मैं दीपक को नही अपना चिरागे - दिल जलाता हूँ ।
है तुझसे इल्तज़ा दिलबर कभी न तोड़ देना प्रीत ।
हवाओं के इशारों पर मुझे मत छोड़ देना मीत ।।
तड़प क्या है कशक क्या जलन और बेकली क्या है
कभी तन्हाई में पढ़ना लहू में डूबा मेरा गीत ।।
युवा कवि एवं शायर
शिवसागर यादव
निवास स्थान- धानी
जिला ~ महराजगंज (उत्तरप्रदेश)
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