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मर्यादा

shivmangal singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नदी सागर से यूं बोली कभी मिलने नहीं आए
        
                                                    
                            
मैं ही हर बार आती हूं यारी छूट जाएगी
छिपा कर गम कहा सागर ने हंसकर आ तो सकता हूं
उठेगा एक बवंडर और दुनिया डूब जाएगी

तुम्हें लगता है कुछ ऐसा तुम्हीं को प्रेम है ज्यादा
यूं ही ठहरे हुए रहना है मेरी एक मर्यादा
तुम्हारे प्रेम की खातिर नहीं यह टूट जाएगी

उठेगा एक बवंडर और दुनिया डूब जाएगी

नदी बोली चलो मना बहुत मजबूर तुम होगे
बताओ इस मिलन पर आज तुम उपहार क्या दोगे
नहीं तो प्रेयसी तुमसे तुम्हारी रूठ जाएगी

मैं ही हर बार आती हूं यारी छूट जाएगी

फलक से चांद तारे तोड़ लाने की मनाही है
सुनामी आ गई तो फिर तबाही ही तबाही है
तेरे उपहार के बदले यह सब कुछ लूट जाएगी

उठेगा एक बवंडर और दुनिया डूब जाएगी

शिव
एक दिन पहले
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