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मर्यादा

                
                                                         
                            नदी सागर से यूं बोली कभी मिलने नहीं आए
                                                                 
                            
मैं ही हर बार आती हूं यारी छूट जाएगी
छिपा कर गम कहा सागर ने हंसकर आ तो सकता हूं
उठेगा एक बवंडर और दुनिया डूब जाएगी

तुम्हें लगता है कुछ ऐसा तुम्हीं को प्रेम है ज्यादा
यूं ही ठहरे हुए रहना है मेरी एक मर्यादा
तुम्हारे प्रेम की खातिर नहीं यह टूट जाएगी

उठेगा एक बवंडर और दुनिया डूब जाएगी

नदी बोली चलो मना बहुत मजबूर तुम होगे
बताओ इस मिलन पर आज तुम उपहार क्या दोगे
नहीं तो प्रेयसी तुमसे तुम्हारी रूठ जाएगी

मैं ही हर बार आती हूं यारी छूट जाएगी

फलक से चांद तारे तोड़ लाने की मनाही है
सुनामी आ गई तो फिर तबाही ही तबाही है
तेरे उपहार के बदले यह सब कुछ लूट जाएगी

उठेगा एक बवंडर और दुनिया डूब जाएगी

शिव
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एक दिन पहले

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