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शाम और ख्वाब

Shivendra Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी हर शाम में ख्वाबों का तेरे जिक्र होता है
        
                                                    
                            
सुना है हर बखत तू ख्वाब में बेफिक्र होता है
मेरी वहशत का मंजर क्या कहूँ तुझसे फ़क़त अब तो
मैं जब जब मुस्कुराता हूँ तो तेरा जिक्र होता है ।।
एक घंटा पहले
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