मेरी हर शाम में ख्वाबों का तेरे जिक्र होता है
सुना है हर बखत तू ख्वाब में बेफिक्र होता है
मेरी वहशत का मंजर क्या कहूँ तुझसे फ़क़त अब तो
मैं जब जब मुस्कुराता हूँ तो तेरा जिक्र होता है ।।
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