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हम तो उनकी राह में

Shivcharan Dass

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम तो उनकी राह में पलकें बिछाये बैठे हैं
        
                                                    
                            
और वो बेवजह ही हमको भुलाये बैठे हैं

करते नहीं बात जब तक आपस में चार यार
लगता है जैसे वक्त से खार खाये बैठे हैं

एक हसीन दिल है जिन्दगी का असल तोहफा
पर लोग इसपे भी तोहमत लगाए बैठे हैं

पानी के बुलबुले सा है यह रूप रँग हमारा
क्यूँ रात दिन इसे यूँ दर्पण में सजाये बैठे हैं

बदनसीब जिन्दगी है अगर काम कुछ भी नहीं
अपने ही सर पे जूँ आफत कोई उठाये बैठे हैं

दास दर्दे दिल जो औरों का ही बाँट लेते हैं
सचमुच वही तो दुनियां को सुन्दर बनाये बैठे हैं
एक घंटा पहले
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