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हम तो उनकी राह में

                
                                                         
                            हम तो उनकी राह में पलकें बिछाये बैठे हैं
                                                                 
                            
और वो बेवजह ही हमको भुलाये बैठे हैं

करते नहीं बात जब तक आपस में चार यार
लगता है जैसे वक्त से खार खाये बैठे हैं

एक हसीन दिल है जिन्दगी का असल तोहफा
पर लोग इसपे भी तोहमत लगाए बैठे हैं

पानी के बुलबुले सा है यह रूप रँग हमारा
क्यूँ रात दिन इसे यूँ दर्पण में सजाये बैठे हैं

बदनसीब जिन्दगी है अगर काम कुछ भी नहीं
अपने ही सर पे जूँ आफत कोई उठाये बैठे हैं

दास दर्दे दिल जो औरों का ही बाँट लेते हैं
सचमुच वही तो दुनियां को सुन्दर बनाये बैठे हैं
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48 मिनट पहले

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