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कदम कदम पर ठोकर

Shivcharan Dass

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कदम कदम पर ठोकर गहरी खाएं हैं
        
                                                    
                            
तब जाकर इस मंजिल पे हम आ पाए हैं
घट जाती है पीर जरा सा बतलाने से
वरना किसने कब अमरत पिलवाये हैं
तेरी सूरत आँखों से ओझल होते ही
ख्वाबों ने भी ख्वाब नये से दिखलाये हैं
एक बार तुम मेहमाँ बनकर भले पधारो
दिल की राहों में मखमल बिछवाये हैं
दास दिलों की नादानी की यही कहानी
आसमान से चाँद सितारे सब लाये हैं. .
6 घंटे पहले
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