अब आओगे तुम, तो कहाँ रूक पाओगे
अकेले तो नहीं रहे, जो ठहर जाओगे ।
न भूला पा रही मैं, न भूलना दे रहे तुम
हाथ थामकर मांगा जब, साथ उम्रभर का
न सोची थी,दगा दे जाओगे।।
नादान थी मैं- कि तुमसे दिल लगाने की खता कर बैठी,
होश न रहा,औरों से भी मेरी तरह फरमाओगे।
देखा उस नूर को मैंने -जिसे तुमने पाया है।
तरस आता है, जब खयाल करती हूँ ,
उसे भी छोड़ तुम किसी और की जु़ल्फों में समा जाओगे ।।
है कैसी ये शख्सियत तुम्हारी -
जो सारे गिले मिटा देती है।
जैसे कभी कुछ हुआ न था
ऐसे मुझे हंसा देती है।
जैसे भी हो, बड़े बेमुरव्वत हो,
खुदा से तो डरते-
जब किसी के दिल में,
झूठी मोहब्बत लिए, पनाह लेते हो ।।